Atmosphere and its Composition

वायुमंडल — संरचना, संघटन, गैसें, धूलकण, जलवाष्प तथा पृथ्वी के लिए इसका महत्व

वायुमंडल का परिचय (Atmosphere)

पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाले गैसों के विशाल आवरण को वायुमंडल (Atmosphere) कहा जाता है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी से बँधा रहता है और ऊँचाई के साथ इसकी घनता धीरे-धीरे कम होती जाती है।

वायुमंडल पृथ्वी की जलवायु एवं मौसम प्रणाली का आधार है। यह सूर्य से आने वाले विकिरण को नियंत्रित करता है, पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा के संतुलन में भूमिका निभाता है तथा जीवों के लिए आवश्यक गैसें उपलब्ध कराता है।

वायुमंडल स्थिर आवरण नहीं है। इसमें गैसों, जलवाष्प, धूलकण, बादलों तथा ऊर्जा का निरंतर संचरण होता रहता है।

वायुमंडल की उत्पत्ति

पृथ्वी के प्रारंभिक वायुमंडल की संरचना वर्तमान वायुमंडल से अलग थी। पृथ्वी के निर्माण के बाद ज्वालामुखीय गैसों के उत्सर्जन, पृथ्वी के ठंडा होने तथा बाद में महासागरों और जीवन के विकास ने वायुमंडल की संरचना को लंबे समय में बदल दिया।

ज्वालामुखीय गैसों से जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन आदि गैसों की महत्वपूर्ण मात्रा वायुमंडल में पहुँची। बाद में पृथ्वी के ठंडा होने पर जलवाष्प के संघनन से महासागरों का विकास हुआ।

प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों के विकास ने वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वायुमंडल का संघटन (Composition)

शुष्क वायु के प्रमुख घटकों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक है। इनके अतिरिक्त आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा अत्यल्प मात्रा में अन्य गैसें उपस्थित रहती हैं।

जलवाष्प की मात्रा स्थिर नहीं रहती। यह स्थान, ऊँचाई, तापमान तथा मौसम के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए जलवाष्प को वायुमंडल का अत्यंत परिवर्तनशील घटक माना जाता है।

वायुमंडल की प्रमुख गैसें

उपर्युक्त प्रतिशत सामान्यतः शुष्क वायु के औसत संघटन को दर्शाते हैं। जलवाष्प एवं कुछ अन्य परिवर्तनशील घटकों के कारण वास्तविक संघटन स्थान और समय के अनुसार बदल सकता है।

नाइट्रोजन का महत्व

नाइट्रोजन वायुमंडल की सबसे अधिक मात्रा में उपस्थित गैस है। यह सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती है।

जीव-जगत के लिए नाइट्रोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैविक यौगिकों का आवश्यक घटक है। वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अधिकांश जीव सीधे उपयोग नहीं कर सकते।

नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) के माध्यम से नाइट्रोजन विभिन्न जैविक एवं अजैविक रूपों के बीच चक्रित होती रहती है।

ऑक्सीजन का महत्व

ऑक्सीजन वायुमंडल की दूसरी सबसे अधिक मात्रा वाली प्रमुख गैस है। अधिकांश जीवों में श्वसन के लिए इसका महत्वपूर्ण स्थान है।

ऑक्सीजन दहन तथा अनेक रासायनिक अभिक्रियाओं में भी भाग लेती है। वायुमंडल में ऑक्सीजन की वर्तमान मात्रा पृथ्वी पर जीवन के विकास के लंबे भूवैज्ञानिक इतिहास से संबंधित है।

प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से पौधे तथा कुछ अन्य जीव ऑक्सीजन को वायुमंडल में जोड़ते हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide)

कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है, लेकिन पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में इसका महत्व अत्यधिक है।

यह सूर्य से आने वाले लघु-तरंग विकिरण को अपेक्षाकृत आसानी से गुजरने देती है, जबकि पृथ्वी की सतह से निकलने वाले दीर्घ-तरंग अवरक्त विकिरण के कुछ भाग को अवशोषित करती है।

इसी कारण कार्बन डाइऑक्साइड प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव में योगदान देने वाली प्रमुख गैसों में से एक है।

हरितगृह गैसें (Greenhouse Gases)

वे गैसें जो पृथ्वी से निकलने वाले दीर्घ-तरंग विकिरण को अवशोषित एवं पुनः उत्सर्जित करती हैं, हरितगृह गैसें कहलाती हैं।

  • जलवाष्प (Water Vapour)
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
  • मीथेन (CH₄)
  • नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)
  • ओजोन (O₃)
  • मानव-निर्मित कुछ फ्लोरीनयुक्त गैसें

प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव पृथ्वी को जीवन के अनुकूल तापमान प्रदान करने में महत्वपूर्ण है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब मानव गतिविधियों के कारण हरितगृह गैसों की सांद्रता में दीर्घकालीन वृद्धि होती है।

जलवाष्प (Water Vapour)

जलवाष्प वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनशील घटक है। इसकी मात्रा सामान्यतः भूमध्यरेखीय एवं गर्म क्षेत्रों में अधिक तथा ठंडे क्षेत्रों में कम होती है।

जलवाष्प बादल निर्माण, वर्षण तथा मौसम संबंधी प्रक्रियाओं में केंद्रीय भूमिका निभाती है।

जलवाष्प स्वयं भी एक शक्तिशाली हरितगृह गैस है और वायुमंडलीय तापमान तथा आर्द्रता के साथ इसका संबंध जलवायु प्रणाली में महत्वपूर्ण प्रतिपुष्टि (Feedback) उत्पन्न करता है।

ओजोन (Ozone)

ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी गैस है और इसका रासायनिक सूत्र O₃ है। यह वायुमंडल में अलग-अलग ऊँचाइयों पर अलग-अलग प्रभाव रखती है।

समतापमंडल (Stratosphere) में उपस्थित ओजोन सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet) विकिरण के एक बड़े भाग को अवशोषित करती है।

इसके विपरीत क्षोभमंडल (Troposphere) के निकट अधिक मात्रा में ओजोन एक वायु प्रदूषक तथा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घटक हो सकती है।

ओजोन परत (Ozone Layer)

समतापमंडल में ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र सामान्यतः ओजोन परत कहलाता है। यह कोई कठोर या स्पष्ट सीमा वाली परत नहीं है, बल्कि एक क्षेत्र है जहाँ ओजोन की सांद्रता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

ओजोन परत सूर्य के पराबैंगनी-B तथा पराबैंगनी-C विकिरण के महत्वपूर्ण हिस्से को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने में योगदान देती है।

धूलकण एवं एरोसोल (Dust and Aerosols)

वायुमंडल में गैसों के अतिरिक्त सूक्ष्म ठोस एवं द्रव कण भी उपस्थित रहते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से एरोसोल (Aerosols) कहा जाता है।

इनके स्रोत प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित दोनों हो सकते हैं। धूल, समुद्री लवण, ज्वालामुखीय राख, परागकण, धुआँ और औद्योगिक कण इसके उदाहरण हैं।

एरोसोल सूर्य के विकिरण के प्रकीर्णन एवं अवशोषण तथा बादल निर्माण की प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

वायुमंडल में धूलकणों का महत्व

  • बादल संघनन नाभिक (Cloud Condensation Nuclei) के रूप में कार्य कर सकते हैं।
  • सूर्य के विकिरण के प्रकीर्णन में योगदान करते हैं।
  • सूर्योदय एवं सूर्यास्त के रंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • वायुमंडलीय दृश्यता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • कुछ एरोसोल पृथ्वी के विकिरण संतुलन को प्रभावित करते हैं।

वायुमंडल में जल का वितरण

वायुमंडल में जल तीनों अवस्थाओं में पाया जा सकता है — जलवाष्प, द्रव जल की बूंदें और बर्फ के क्रिस्टल।

जलवाष्प की मात्रा भूमध्यरेखीय एवं गर्म आर्द्र क्षेत्रों में अधिक तथा ध्रुवीय एवं अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में बहुत कम होती है।

जलवाष्प का ऊर्ध्वाधर वितरण भी असमान है। सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने के साथ वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा तेजी से कम होती है।

वायुमंडल का ऊर्ध्वाधर वितरण

ऊँचाई के साथ तापमान में होने वाले परिवर्तन तथा अन्य भौतिक विशेषताओं के आधार पर वायुमंडल को विभिन्न परतों में बाँटा जाता है।

  • क्षोभमंडल (Troposphere)
  • समतापमंडल (Stratosphere)
  • मध्यमंडल (Mesosphere)
  • तापमंडल (Thermosphere)
  • बहिर्मंडल (Exosphere)

इन परतों की सीमाएँ अक्षांश एवं मौसम के अनुसार कुछ हद तक परिवर्तित हो सकती हैं।

क्षोभमंडल (Troposphere)

यह वायुमंडल की सबसे निचली परत है और पृथ्वी की सतह से सीधे संपर्क में रहती है। मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ इसी परत में घटित होती हैं।

इसमें वायुमंडल की अधिकांश जलवाष्प, धूलकण और मौसम संबंधी गतिविधियाँ केंद्रित रहती हैं।

सामान्य परिस्थितियों में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है। इस औसत तापमान ह्रास को सामान्य ताप ह्रास दर (Normal Lapse Rate) से व्यक्त किया जाता है, जिसका औसत मान लगभग 6.5°C प्रति किलोमीटर माना जाता है।

क्षोभसीमा (Tropopause)

क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच की संक्रमण सीमा को क्षोभसीमा (Tropopause) कहा जाता है।

इसकी ऊँचाई स्थिर नहीं होती। भूमध्यरेखा के पास यह अपेक्षाकृत अधिक ऊँची तथा ध्रुवों के पास अपेक्षाकृत नीची होती है।

क्षोभसीमा की ऊँचाई मौसम एवं वायुमंडलीय परिस्थितियों के अनुसार भी बदल सकती है।

समतापमंडल (Stratosphere)

समतापमंडल क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। इसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान सामान्यतः बढ़ता है। इसका प्रमुख कारण ओजोन द्वारा पराबैंगनी विकिरण का अवशोषण है।

इस परत में वायु अपेक्षाकृत स्थिर होती है और ऊर्ध्वाधर संवहन क्षोभमंडल की तुलना में कम होता है।

बड़े वाणिज्यिक विमानों की कुछ उड़ानें समतापमंडल के निचले हिस्से के निकट संचालित हो सकती हैं क्योंकि वहाँ वायुमंडलीय अशांति सामान्यतः कम होती है।

समतापसीमा (Stratopause)

समतापमंडल और मध्यमंडल के बीच की सीमा को समतापसीमा (Stratopause) कहा जाता है।

इस सीमा के आसपास तापमान समतापमंडल में अधिकतम स्तर तक पहुँचने के बाद ऊपर की ओर बढ़ने पर फिर घटने लगता है।

मध्यमंडल (Mesosphere)

मध्यमंडल समतापमंडल के ऊपर स्थित है। इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान पुनः घटता है।

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले अनेक छोटे उल्कीय पिंड इस क्षेत्र में वायु के साथ घर्षण एवं अन्य प्रक्रियाओं के कारण जलने लगते हैं।

मध्यमंडल के ऊपरी भाग को मध्यमसीमा (Mesopause) कहा जाता है, जहाँ वायुमंडल के सबसे कम तापमानों में से कुछ पाए जाते हैं।

तापमंडल (Thermosphere)

तापमंडल मध्यमंडल के ऊपर स्थित है। इसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान काफी बढ़ सकता है क्योंकि उच्च-ऊर्जा सौर विकिरणों का अवशोषण होता है।

इस क्षेत्र में वायुमंडलीय गैसों का घनत्व बहुत कम होता है, इसलिए यहाँ तापमान का अर्थ पृथ्वी की सतह के तापमान से अलग तरीके से समझा जाता है।

आयनमंडल (Ionosphere) का महत्वपूर्ण भाग तापमंडल के भीतर पाया जाता है।

आयनमंडल (Ionosphere)

वायुमंडल के उस क्षेत्र को आयनमंडल कहा जाता है जहाँ सौर विकिरण के कारण गैस के अणु एवं परमाणु आयनित हो जाते हैं।

आयनमंडल रेडियो तरंगों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी विद्युत विशेषताएँ सौर गतिविधि, दिन-रात तथा ऊँचाई के साथ बदल सकती हैं।

ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखाई देने वाली ऑरोरा (Aurora) जैसी घटनाएँ ऊपरी वायुमंडल में ऊर्जावान कणों और गैसों की अंतःक्रिया से संबंधित हैं।

बहिर्मंडल (Exosphere)

बहिर्मंडल वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है। यहाँ गैसों का घनत्व अत्यंत कम होता है और कणों के बीच दूरी बहुत अधिक होती है।

इस क्षेत्र में हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के तत्व अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। बहिर्मंडल धीरे-धीरे अंतरिक्ष के अत्यंत विरल वातावरण में परिवर्तित हो जाता है।

वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure)

किसी स्थान पर उसके ऊपर स्थित वायुमंडलीय वायु के भार द्वारा लगाए गए दाब को वायुमंडलीय दाब कहा जाता है।

समुद्र तल पर औसत वायुमंडलीय दाब लगभग 1013.25 मिलीबार माना जाता है। ऊँचाई बढ़ने के साथ वायु का घनत्व कम होने के कारण वायुमंडलीय दाब भी सामान्यतः घटता है।

वायुमंडल का तापीय महत्व

वायुमंडल पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच ऊर्जा के आदान-प्रदान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सूर्य से आने वाला अधिकांश ऊर्जा प्रवाह लघु-तरंग विकिरण के रूप में आता है। पृथ्वी की सतह इस ऊर्जा का कुछ भाग अवशोषित करके बाद में दीर्घ-तरंग विकिरण के रूप में ऊर्जा वापस छोड़ती है।

वायुमंडलीय गैसें इस दीर्घ-तरंग विकिरण के एक हिस्से को अवशोषित करती हैं, जिससे प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव उत्पन्न होता है।

वायुमंडल और जल चक्र (Water Cycle)

वायुमंडल जल चक्र का महत्वपूर्ण भाग है। महासागर, नदियाँ, झीलें और मृदा से जल वाष्पित होकर वायुमंडल में पहुँचता है।

जलवाष्प ऊपर जाकर ठंडी होती है और संघनन के माध्यम से बादलों का निर्माण कर सकती है। इसके बाद वर्षा, हिमपात या अन्य प्रकार के वर्षण के रूप में जल पुनः पृथ्वी की सतह पर लौटता है।

वायुमंडल और मौसम (Weather)

मौसम किसी स्थान पर किसी निश्चित समय या अल्प अवधि में वायुमंडल की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षा इसके प्रमुख घटक हैं।

मौसम की अधिकांश घटनाएँ क्षोभमंडल में होती हैं क्योंकि जलवाष्प, धूलकण और अधिकांश मौसम संबंधी प्रक्रियाएँ इसी परत में केंद्रित रहती हैं।

वायुमंडल और जलवायु (Climate)

जलवायु किसी क्षेत्र की लंबी अवधि में देखी गई औसत मौसम परिस्थितियों तथा उनकी परिवर्तनशीलता को दर्शाती है।

वायुमंडलीय परिसंचरण, सौर विकिरण, महासागरीय धाराएँ, स्थलाकृति, अक्षांश तथा वायुमंडल की संरचना मिलकर किसी क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित करते हैं।

वायुमंडल का मानव जीवन में महत्व

वायुमंडल में गैसों का परिवर्तन

वायुमंडल का संघटन पूर्णतः स्थिर नहीं है। प्राकृतिक प्रक्रियाएँ तथा मानव गतिविधियाँ इसकी कुछ गैसों की सांद्रता को प्रभावित करती हैं।

  • ज्वालामुखीय गतिविधियाँ गैसों को वायुमंडल में जोड़ती हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन छोड़ता है।
  • श्वसन एवं अपघटन कार्बन डाइऑक्साइड को पुनः वायुमंडल में जोड़ते हैं।
  • जीवाश्म ईंधन का दहन कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों को बढ़ा सकता है।
  • वनों की कटाई कार्बन चक्र और वायुमंडलीय गैसों के संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

वायुमंडलीय प्रदूषण (Atmospheric Pollution)

वायुमंडल में ऐसे पदार्थों की मात्रा का बढ़ जाना जो मानव, जीव-जगत या पर्यावरण के लिए हानिकारक प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं, वायुमंडलीय प्रदूषण कहलाता है।

प्रमुख प्रदूषकों में कणिकीय पदार्थ, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन तथा विभिन्न वाष्पशील कार्बनिक यौगिक शामिल हो सकते हैं।

वायुमंडल और वैश्विक तापवृद्धि

प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव पृथ्वी की ऊर्जा प्रणाली का सामान्य हिस्सा है। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद मानव गतिविधियों से कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य दीर्घजीवी हरितगृह गैसों की सांद्रता में वृद्धि हुई है।

इन गैसों की बढ़ती सांद्रता पृथ्वी के विकिरण संतुलन को प्रभावित करती है और वैश्विक औसत तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि में योगदान करती है।

वायुमंडल की परतों का संक्षिप्त क्रम

  • क्षोभमंडल — मौसम की अधिकांश घटनाएँ।
  • समतापमंडल — ओजोन की महत्वपूर्ण सांद्रता।
  • मध्यमंडल — अनेक उल्कीय पिंडों का जलना।
  • तापमंडल — उच्च-ऊर्जा सौर विकिरण का प्रभाव एवं आयनीकरण।
  • बहिर्मंडल — वायुमंडल की सबसे बाहरी, अत्यंत विरल परत।

महत्वपूर्ण तथ्य

परीक्षा में पूछे जाने योग्य अवधारणात्मक बिंदु

  • वायुमंडल की संरचना में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  • जलवाष्प को वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनशील घटक क्यों माना जाता है?
  • क्षोभमंडल और समतापमंडल में तापमान परिवर्तन की प्रकृति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • समतापमंडल में तापमान ऊँचाई के साथ क्यों बढ़ता है?
  • ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  • प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव और मानव-प्रेरित वैश्विक तापवृद्धि के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • वायुमंडलीय एरोसोल पृथ्वी के विकिरण संतुलन को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं?
  • वायुमंडल मौसम एवं जलवायु को किस प्रकार नियंत्रित करता है?
  • ऊँचाई के साथ वायुमंडलीय दाब में कमी क्यों होती है?
  • वायुमंडल की विभिन्न परतों की प्रमुख विशेषताओं का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।