मरुस्थल एवं घासभूमि — परिचय
मरुस्थल (Desert) ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ वर्षण बहुत कम होता है
और उपलब्ध नमी अत्यंत सीमित होती है। सामान्यतः मरुस्थलीय क्षेत्रों में
वार्षिक वर्षा लगभग 250 मिमी से कम मानी जाती है, हालांकि मरुस्थल की
पहचान केवल वर्षा की किसी एक निश्चित सीमा पर निर्भर नहीं करती।
घासभूमि (Grassland) ऐसे प्राकृतिक वनस्पति प्रदेश हैं जहाँ
घास प्रमुख वनस्पति होती है तथा वृक्षों का घनत्व सामान्यतः कम होता है।
वर्षा, तापमान, मिट्टी, आग और चराई जैसी प्राकृतिक एवं मानवीय प्रक्रियाएँ
इनके स्वरूप को प्रभावित करती हैं।
मरुस्थल बनने के प्रमुख कारण
- उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब: लगभग 20°–30° अक्षांशों में अवरोही वायु वर्षा को सीमित करती है।
- वर्षाछाया प्रभाव: पर्वत के पवनविमुख भाग में वर्षा कम होने से शुष्क क्षेत्र विकसित हो सकता है।
- ठंडी महासागरीय धाराएँ: तटीय वायु में स्थिरता बढ़ाकर वर्षा को सीमित कर सकती हैं।
- महाद्वीपीयता: समुद्र से बहुत दूर होने के कारण नमी की उपलब्धता कम हो जाती है।
- ध्रुवीय उच्च दाब: अत्यधिक ठंडी और शुष्क वायु के कारण ध्रुवीय मरुस्थल विकसित होते हैं।
मरुस्थलों के प्रमुख प्रकार
- उष्ण एवं उपोष्ण मरुस्थल: गर्म और शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- तटीय मरुस्थल (Coastal Desert): ठंडी महासागरीय धाराओं से प्रभावित तटों पर पाए जाते हैं।
- महाद्वीपीय मरुस्थल: महाद्वीपों के आंतरिक भागों में समुद्र से दूरी के कारण विकसित होते हैं।
- वर्षाछाया मरुस्थल: पर्वतों के पवनविमुख भाग में विकसित होते हैं।
- ध्रुवीय मरुस्थल (Polar Desert): अत्यधिक ठंडे और शुष्क ध्रुवीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
मरुस्थलीय जलवायु की प्रमुख विशेषताएँ
- वर्षा बहुत कम और अनियमित होती है।
- बादल कम होने के कारण दिन में सौर विकिरण अधिक होता है।
- रात्रि में विकिरणीय शीतलन अधिक होता है।
- कई मरुस्थलीय क्षेत्रों में दैनिक तापांतर अधिक होता है।
- वनस्पति सामान्यतः विरल होती है।
- कई क्षेत्रों में धूल भरी आँधी और रेत के तूफान सामान्य हैं।
विश्व के प्रमुख मरुस्थल
| मरुस्थल |
महाद्वीप |
प्रमुख विशेषता |
| सहारा |
अफ्रीका |
विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल |
| अरब मरुस्थल |
एशिया |
अरब प्रायद्वीप का विशाल शुष्क क्षेत्र |
| गोबी |
एशिया |
ठंडा महाद्वीपीय मरुस्थल |
| तक्लामकान |
एशिया |
चीन के तारिम बेसिन में स्थित |
| थार |
एशिया |
भारत–पाकिस्तान क्षेत्र |
| अटाकामा |
दक्षिण अमेरिका |
अत्यंत शुष्क तटीय मरुस्थल |
| कालाहारी |
अफ्रीका |
दक्षिणी अफ्रीका का अर्ध-शुष्क क्षेत्र |
| नामीब |
अफ्रीका |
ठंडी महासागरीय धारा से प्रभावित तटीय मरुस्थल |
| पेटागोनियन |
दक्षिण अमेरिका |
एंडीज के वर्षाछाया प्रभाव से संबंधित |
| ग्रेट विक्टोरिया |
ऑस्ट्रेलिया |
ऑस्ट्रेलिया का विशाल मरुस्थलीय क्षेत्र |
सहारा मरुस्थल (Sahara Desert)
सहारा उत्तरी अफ्रीका में स्थित विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल है।
इसका विस्तार अटलांटिक महासागर से लाल सागर तक व्यापक क्षेत्र में है।
- लगभग 15°–30° उत्तरी अक्षांशों के आसपास विस्तृत।
- उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब इसका महत्वपूर्ण जलवायवीय कारण है।
- बालू के समुद्र के साथ-साथ चट्टानी और बजरी वाले क्षेत्र भी पाए जाते हैं।
- ओएसिस (Oasis) मानव बस्तियों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
- सहारा के दक्षिण में साहेल (Sahel) संक्रमण क्षेत्र स्थित है।
ओएसिस (Oasis)
मरुस्थल में ऐसा स्थानीय क्षेत्र जहाँ भूजल या किसी अन्य स्रोत के कारण
पर्याप्त जल उपलब्ध हो जाता है और वनस्पति तथा मानव बस्ती विकसित हो सकती है,
उसे ओएसिस कहते हैं।
ओएसिस विशेष रूप से मरुस्थलीय कृषि, खजूर उत्पादन, पशुपालन और ऐतिहासिक
व्यापारिक मार्गों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
अटाकामा मरुस्थल (Atacama Desert)
अटाकामा दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर मुख्यतः उत्तरी चिली में स्थित है।
यह पृथ्वी के अत्यंत शुष्क गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में से एक है।
- प्रशांत महासागर के निकट स्थित है।
- हम्बोल्ट/पेरू ठंडी महासागरीय धारा का प्रभाव है।
- एंडीज पर्वत भी वर्षा को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कुछ क्षेत्रों में वर्षा अत्यंत दुर्लभ है।
- खनिज संसाधनों, विशेषकर तांबा और नाइट्रेट, के कारण आर्थिक महत्व है।
नामीब मरुस्थल (Namib Desert)
नामीब दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के अटलांटिक तट के साथ फैला हुआ तटीय
मरुस्थल है। इसकी शुष्कता में बेंगुएला ठंडी महासागरीय धारा
की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समुद्र से आने वाली नम हवा ठंडी धारा के प्रभाव से संघनित होकर कोहरा पैदा
कर सकती है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होती। इसलिए यहाँ मरुस्थलीय
परिस्थितियाँ बनी रहती हैं।
गोबी मरुस्थल (Gobi Desert)
गोबी एशिया के आंतरिक भाग में मंगोलिया और चीन के क्षेत्र में स्थित है।
यह मुख्यतः एक ठंडा महाद्वीपीय मरुस्थल है।
- समुद्र से बहुत दूर होने के कारण महाद्वीपीय प्रभाव अधिक है।
- ग्रीष्म में अपेक्षाकृत गर्म और शीत में अत्यधिक ठंड होती है।
- रेत के अलावा बजरी और चट्टानी सतह भी व्यापक है।
- तापमान में अत्यधिक मौसमी अंतर पाया जाता है।
थार मरुस्थल (Thar Desert)
थार मरुस्थल भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित है। भारत में इसका अधिकांश
भाग राजस्थान में है।
- अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में विस्तृत है।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून की दिशा और अरावली की स्थिति इसके वर्षा वितरण को प्रभावित करती है।
- बालू के टीले, शुष्क जलवायु और विरल वनस्पति इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- सिंचाई के विस्तार से कुछ क्षेत्रों में कृषि और मानव बसावट बढ़ी है।
- इंदिरा गांधी नहर क्षेत्रीय कृषि में महत्वपूर्ण है।
मरुस्थलीय वनस्पति (Desert Vegetation)
मरुस्थलीय पौधों में जल की कमी से बचने के लिए विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं।
ऐसी वनस्पतियों को सामान्यतः Xerophytes कहा जाता है।
- गहरी जड़ें या व्यापक जड़ तंत्र।
- पत्तियों का काँटों में रूपांतरण।
- मोटी मोमी सतह।
- तने में जल संग्रह।
- वाष्पोत्सर्जन को कम करने की क्षमता।
- अल्प अवधि में जीवन चक्र पूरा करने वाले पौधे।
घासभूमि (Grasslands) — परिचय
घासभूमि ऐसे प्राकृतिक वनस्पति क्षेत्र हैं जहाँ घास प्रमुख होती है और
वृक्षों का घनत्व सामान्यतः कम होता है। घासभूमियों का विकास मुख्यतः
वर्षा की मात्रा, तापमान, मिट्टी, आग और चराई के संयुक्त प्रभाव से होता है।
घासभूमियाँ विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकसित होती हैं जहाँ वर्षा
इतनी कम होती है कि घने वन नहीं बन पाते, लेकिन इतनी अधिक होती है कि
लगातार मरुस्थलीय परिस्थितियाँ भी नहीं बनतीं।
घासभूमियों के प्रमुख प्रकार
- उष्णकटिबंधीय घासभूमि: सवाना।
- समशीतोष्ण घासभूमि: प्रेयरी, स्टेपी, पम्पास, वेल्ड आदि।
विश्व की प्रमुख घासभूमियाँ
| घासभूमि |
क्षेत्र |
प्रमुख विशेषता |
| Prairies |
उत्तरी अमेरिका |
गेहूँ एवं मक्का उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण |
| Pampas |
दक्षिण अमेरिका |
अत्यंत उपजाऊ समशीतोष्ण घासभूमि |
| Steppes |
यूरेशिया |
अर्ध-शुष्क समशीतोष्ण घासभूमि |
| Veld |
दक्षिण अफ्रीका |
पशुपालन एवं कृषि के लिए महत्वपूर्ण |
| Downs |
ऑस्ट्रेलिया |
पशुपालन एवं कृषि के लिए महत्वपूर्ण |
| Savanna |
अफ्रीका |
उष्णकटिबंधीय घास एवं बिखरे वृक्ष |
प्रेयरी (Prairies)
प्रेयरी उत्तरी अमेरिका के आंतरिक मैदानों में विस्तृत समशीतोष्ण घासभूमि है।
यह मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के कुछ भागों में पाई जाती है।
- उपजाऊ मिट्टी और कृषि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ।
- गेहूँ, मक्का और सोयाबीन की खेती महत्वपूर्ण है।
- यंत्रीकृत कृषि का व्यापक विकास हुआ है।
- पशुपालन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है।
पम्पास (Pampas)
पम्पास दक्षिण अमेरिका में मुख्यतः अर्जेंटीना और उरुग्वे के क्षेत्र में
स्थित उपजाऊ समशीतोष्ण घासभूमि है।
- समतल स्थलरूप।
- उपजाऊ मिट्टी।
- गेहूँ और अन्य अनाजों की खेती।
- पशुपालन और मांस उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।
- निर्यात आधारित कृषि का महत्वपूर्ण क्षेत्र।
स्टेपी (Steppes)
स्टेपी मुख्यतः यूरेशिया के आंतरिक भागों में फैली अर्ध-शुष्क समशीतोष्ण
घासभूमि है।
- वर्षा प्रेयरी की तुलना में सामान्यतः कम होती है।
- पेड़ कम और छोटी घास अधिक होती है।
- यूक्रेन, दक्षिणी रूस, कजाखस्तान तथा मध्य एशिया में व्यापक क्षेत्र।
- गेहूँ उत्पादन और पशुपालन दोनों महत्वपूर्ण हैं।
वेल्ड (Veld)
वेल्ड दक्षिणी अफ्रीका की घासभूमियों के लिए प्रयुक्त शब्द है। दक्षिण
अफ्रीका के आंतरिक पठारी क्षेत्रों में इसका व्यापक विस्तार है।
- घास और झाड़ीदार वनस्पति।
- पशुपालन महत्वपूर्ण है।
- कुछ क्षेत्रों में मक्का और अन्य कृषि फसलें उगाई जाती हैं।
- खनिज संसाधनों वाले क्षेत्रों से आर्थिक संबंध है।
डाउन्स (Downs)
डाउन्स ऑस्ट्रेलिया के कुछ समशीतोष्ण घासभूमि क्षेत्रों के लिए प्रयुक्त
नाम है। ये विशेष रूप से पशुपालन और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
सवाना (Savanna)
सवाना उष्णकटिबंधीय घासभूमि है जिसमें घास के साथ बिखरे हुए वृक्ष पाए जाते हैं।
यहाँ वर्षा और शुष्क ऋतु स्पष्ट रूप से अलग होती हैं।
- अफ्रीका में इसका व्यापक विस्तार है।
- वर्षा ऋतु में घास तेजी से बढ़ती है।
- शुष्क ऋतु में वनाग्नि और चराई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- बड़े शाकाहारी और मांसाहारी जीवों का समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र पाया जाता है।
घासभूमियों में आग की भूमिका
घासभूमियों में प्राकृतिक या मानव-जनित आग वनस्पति की संरचना को प्रभावित
करती है। कई घास प्रजातियाँ आग के बाद पुनः तेजी से विकसित हो सकती हैं।
नियंत्रित आग कुछ क्षेत्रों में झाड़ियों और वृक्षों के अत्यधिक विस्तार को
रोक सकती है, लेकिन अत्यधिक या अनियंत्रित आग मिट्टी, जैव विविधता और
कार्बन भंडार को नुकसान पहुँचा सकती है।
घासभूमियाँ और पशुपालन
घासभूमियाँ प्राकृतिक चरागाहों के रूप में महत्वपूर्ण हैं। विश्व के अनेक
बड़े पशुपालन क्षेत्र घासभूमियों से जुड़े हैं।
- गाय पालन
- भेड़ पालन
- घोड़े
- ऊन उत्पादन
- मांस और डेयरी उद्योग
घासभूमियाँ और कृषि
समशीतोष्ण घासभूमियों में सामान्यतः गहरी और जैविक पदार्थों से समृद्ध
मिट्टी विकसित हो सकती है। इसी कारण प्रेयरी और पम्पास जैसे क्षेत्र
व्यावसायिक कृषि के महत्वपूर्ण केंद्र बने हैं।
- गेहूँ
- मक्का
- सोयाबीन
- जौ
- पशु चारा
मरुस्थल और घासभूमि — तुलनात्मक अध्ययन
| आधार |
मरुस्थल |
घासभूमि |
| वर्षा |
बहुत कम |
मरुस्थल से अधिक |
| वनस्पति |
विरल |
घास प्रमुख |
| वृक्ष |
बहुत कम |
समशीतोष्ण घासभूमि में कम, सवाना में बिखरे हुए |
| मुख्य आर्थिक गतिविधि |
पशुपालन, खनन, सिंचित कृषि |
कृषि एवं पशुपालन |
| जल उपलब्धता |
अत्यंत सीमित |
मौसमी एवं क्षेत्रानुसार पर्याप्त |
मरुस्थलीकरण (Desertification)
मरुस्थलीकरण का अर्थ शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र
क्षेत्रों में भूमि की उत्पादकता तथा पारिस्थितिक गुणवत्ता में गिरावट से है।
यह केवल प्राकृतिक मरुस्थल के विस्तार के समान नहीं है।
मरुस्थलीकरण को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में अत्यधिक चराई, वनों की कटाई,
अस्थिर कृषि, मिट्टी का क्षरण, अनुचित सिंचाई, जलवायु परिवर्तन और जल
संसाधनों का अत्यधिक दोहन शामिल हो सकते हैं।
मरुस्थलीकरण रोकने के उपाय
- वर्षा जल संचयन।
- सूखा-सहिष्णु फसलों का उपयोग।
- नियंत्रित चराई।
- वनरोपण एवं देशी प्रजातियों का संरक्षण।
- मिट्टी एवं जल संरक्षण।
- पवन अपरदन को रोकने के लिए Shelterbelts।
- उचित सिंचाई प्रबंधन।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
जलवायु परिवर्तन का मरुस्थल और घासभूमियों पर प्रभाव
- तापमान में वृद्धि।
- सूखे की आवृत्ति और तीव्रता में परिवर्तन।
- घासभूमियों की उत्पादकता में परिवर्तन।
- मरुस्थलीकरण का जोखिम बढ़ना।
- वनाग्नि के पैटर्न में परिवर्तन।
- पशुधन एवं वन्यजीवों के लिए चारे और जल की उपलब्धता प्रभावित होना।
- प्रजातियों के भौगोलिक वितरण में परिवर्तन।
मरुस्थल और घासभूमि का पारिस्थितिक महत्व
- विशिष्ट जैव विविधता का संरक्षण।
- कार्बन का भंडारण।
- मिट्टी संरक्षण।
- चरागाह उपलब्ध कराना।
- परागण करने वाले जीवों के लिए आवास।
- वन्यजीव संरक्षण।
- स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों की आजीविका।
महत्वपूर्ण तथ्य
- Sahara: विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल।
- Gobi: एशिया का प्रमुख ठंडा महाद्वीपीय मरुस्थल।
- Atacama: अत्यंत शुष्क तटीय मरुस्थल।
- Namib: बेंगुएला ठंडी धारा से प्रभावित।
- Thar: भारत–पाकिस्तान क्षेत्र।
- Kalahari: दक्षिणी अफ्रीका।
- Patagonian Desert: एंडीज के वर्षाछाया प्रभाव से संबंधित।
- Prairies: उत्तरी अमेरिका।
- Pampas: दक्षिण अमेरिका।
- Steppes: यूरेशिया।
- Veld: दक्षिणी अफ्रीका।
- Downs: ऑस्ट्रेलिया।
- Savanna: उष्णकटिबंधीय घासभूमि।
- Oasis: मरुस्थल में जल उपलब्धता वाला स्थानीय क्षेत्र।
सामान्य गलतियाँ
- सहारा को विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल कहना — यह केवल गर्म मरुस्थल के संदर्भ में सही है।
- अंटार्कटिका को मरुस्थल न मानना — अत्यंत कम वर्षा के कारण यह एक ध्रुवीय मरुस्थल है।
- अटाकामा की शुष्कता में ठंडी महासागरीय धारा की भूमिका भूलना।
- नामीब और कालाहारी को समान प्रकार का तटीय मरुस्थल मानना।
- सवाना को समशीतोष्ण घासभूमि समझना।
- Prairies, Pampas और Steppes को एक ही क्षेत्र मानना।
- मरुस्थलीकरण को केवल प्राकृतिक मरुस्थल के विस्तार के रूप में समझना।
- घासभूमियों को जैव विविधता की दृष्टि से महत्वहीन मानना।
विश्लेषण
मरुस्थल और घासभूमियाँ पृथ्वी के ऐसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं
जहाँ जल उपलब्धता, तापमान और मौसमी परिस्थितियाँ वनस्पति के स्वरूप को
नियंत्रित करती हैं। मरुस्थलों में जल की कमी के कारण विशिष्ट अनुकूलन वाली
वनस्पतियाँ विकसित होती हैं, जबकि घासभूमियों में मौसमी वर्षा तथा आग और
चराई जैसी प्रक्रियाएँ वनस्पति की संरचना को प्रभावित करती हैं।
आधुनिक समय में जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक चराई, भूमि क्षरण और अस्थिर
कृषि के कारण इन क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। इसलिए मरुस्थलीकरण की
रोकथाम, टिकाऊ चरागाह प्रबंधन, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और स्थानीय
समुदायों की भागीदारी को एकीकृत दृष्टिकोण के रूप में अपनाना आवश्यक है।
Quick Revision — एक नजर में
- Sahara: सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल।
- Gobi: ठंडा महाद्वीपीय मरुस्थल।
- Atacama: अत्यंत शुष्क तटीय मरुस्थल।
- Namib: Benguela Current का प्रभाव।
- Thar: भारत–पाकिस्तान।
- Kalahari: दक्षिणी अफ्रीका।
- Prairies: उत्तरी अमेरिका।
- Pampas: दक्षिण अमेरिका।
- Steppes: यूरेशिया।
- Veld: दक्षिणी अफ्रीका।
- Downs: ऑस्ट्रेलिया।
- Savanna: उष्णकटिबंधीय घासभूमि।
- Desertification: शुष्क क्षेत्रों में भूमि की उत्पादकता एवं पारिस्थितिक गुणवत्ता में गिरावट।
निष्कर्ष
मरुस्थल और घासभूमियाँ केवल शुष्क या खाली भूभाग नहीं हैं, बल्कि अत्यंत
विशिष्ट और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं। UPSC के लिए इनके अध्ययन
में जलवायु → वर्षा → वनस्पति → मिट्टी → कृषि/पशुपालन →
मानव गतिविधि → पर्यावरणीय समस्याएँ के पूरे संबंध को समझना
आवश्यक है।