भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य है जिसकी शासन व्यवस्था में संघ और राज्यों के बीच संवैधानिक शक्तियों का विभाजन किया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को राज्यों का संघ (Union of States) कहा गया है।
भारत का प्रशासनिक मानचित्र स्वतंत्रता के बाद अनेक बार बदला है। भाषाई पहचान, प्रशासनिक सुविधा, क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, आर्थिक व्यवहार्यता और राष्ट्रीय एकता राज्य पुनर्गठन के प्रमुख आधार रहे हैं।
वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं। यह संख्या 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और 2020 में दो केंद्रशासित प्रदेशों के विलय के बाद वर्तमान स्वरूप में आई।
भारतीय संविधान के भाग I में अनुच्छेद 1 से 4 तक संघ और उसके राज्य-क्षेत्र से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
| अनुच्छेद | मुख्य प्रावधान | परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 1 | भारत का नाम और राज्य-क्षेत्र | भारत अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ है। |
| अनुच्छेद 2 | नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना | संसद कानून द्वारा नए राज्यों को संघ में प्रवेश दे सकती है या उनकी स्थापना कर सकती है। |
| अनुच्छेद 3 | नए राज्यों का गठन तथा राज्यों के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन | संबंधित राज्य के विधानमंडल से विचार माँगे जा सकते हैं, लेकिन उसकी राय संसद पर बाध्यकारी नहीं होती। |
| अनुच्छेद 4 | अनुच्छेद 2 और 3 के अंतर्गत बनाए गए कानूनों के पूरक प्रावधान | ऐसे कानूनों को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माना जाता। |
महत्वपूर्ण अंतर: अनुच्छेद 2 मुख्यतः नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 3 मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन और नए राज्यों के गठन की प्रक्रिया से संबंधित है।
1947 में स्वतंत्रता के समय भारत में ब्रिटिश शासन के पूर्व प्रांतों के साथ अनेक देशी रियासतें भी थीं। इन रियासतों के एकीकरण के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना आवश्यक था।
संविधान लागू होने के बाद राज्यों को प्रारंभ में विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया था। यह व्यवस्था बाद में राज्य पुनर्गठन के माध्यम से समाप्त कर दी गई।
यह ऐतिहासिक वर्गीकरण वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। इसे 1956 के व्यापक पुनर्गठन के दौरान समाप्त कर दिया गया।
स्वतंत्रता के बाद विभिन्न भाषाई समुदायों ने अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर अलग राज्यों की माँग की। यह भारतीय संघवाद के विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था।
तेलुगु भाषी क्षेत्र के लिए अलग राज्य की माँग को लेकर पोट्टि श्रीरामुलु ने आमरण अनशन किया। 1952 में उनकी मृत्यु के बाद आंदोलन तेज हुआ और 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य का गठन किया गया।
आंध्र राज्य का गठन स्वतंत्रता के बाद भाषाई आधार पर गठित पहला राज्य माना जाता है। उस समय इसमें तेलुगु भाषी क्षेत्र शामिल था; हैदराबाद राज्य का तेलंगाना क्षेत्र इसमें शामिल नहीं था।
राज्यों के पुनर्गठन के प्रश्न पर विचार करने के लिए 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 और सातवाँ संविधान संशोधन, 1956 भारतीय प्रशासनिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं।
इनके माध्यम से राज्यों की सीमाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए गए। संविधान में राज्यों की पुरानी भाग A, भाग B और भाग C वाली श्रेणियाँ समाप्त कर दी गईं।
भाषाई आधार महत्वपूर्ण था, लेकिन राज्य पुनर्गठन में प्रशासनिक सुविधा, आर्थिक स्थिति, क्षेत्रीय परिस्थितियों और राष्ट्रीय एकता को भी ध्यान में रखा गया।
नीचे भारत के वर्तमान राज्यों और उनकी सामान्यतः स्वीकृत राजधानियों की सूची दी गई है। कुछ राज्यों में मौसमी या ग्रीष्मकालीन राजधानी की अलग व्यवस्था भी है।
| क्रम | राज्य | राजधानी | गठन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | आंध्र राज्य 1953 में बना; वर्तमान आंध्र प्रदेश का गठन 1956 में हुआ। |
| 2 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | 20 फरवरी 1987 को पूर्ण राज्य बना। |
| 3 | असम | दिसपुर | पूर्वोत्तर भारत का महत्वपूर्ण राज्य। |
| 4 | बिहार | पटना | प्राचीन मगध क्षेत्र का महत्वपूर्ण भाग। |
| 5 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग हुआ। |
| 6 | गोवा | पणजी | 30 मई 1987 को पूर्ण राज्य बना। |
| 7 | गुजरात | गांधीनगर | 1 मई 1960 को बंबई राज्य के विभाजन से बना। |
| 8 | हरियाणा | चंडीगढ़ | 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग हुआ। |
| 9 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य बना। |
| 10 | झारखंड | राँची | 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग हुआ। |
| 11 | कर्नाटक | बेंगलुरु | राज्य का नाम 1973 में मैसूर से कर्नाटक किया गया। |
| 12 | केरल | तिरुवनंतपुरम | 1 नवंबर 1956 को गठन हुआ। |
| 13 | मध्य प्रदेश | भोपाल | वर्तमान स्वरूप 1956 के पुनर्गठन से जुड़ा है। |
| 14 | महाराष्ट्र | मुंबई | 1 मई 1960 को बंबई राज्य के विभाजन से बना। |
| 15 | मणिपुर | इंफाल | 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य बना। |
| 16 | मेघालय | शिलांग | 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य बना। |
| 17 | मिजोरम | आइजोल | 20 फरवरी 1987 को पूर्ण राज्य बना। |
| 18 | नागालैंड | कोहिमा | 1 दिसंबर 1963 को राज्य बना। |
| 19 | ओडिशा | भुवनेश्वर | पूर्व नाम उड़ीसा था; 2011 में नाम परिवर्तन प्रभावी हुआ। |
| 20 | पंजाब | चंडीगढ़ | 1966 के पुनर्गठन से वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। |
| 21 | राजस्थान | जयपुर | रियासतों के एकीकरण के बाद वर्तमान राज्य विकसित हुआ। |
| 22 | सिक्किम | गंगटोक | 1975 में भारत का राज्य बना। |
| 23 | तमिलनाडु | चेन्नई | 1969 में मद्रास राज्य का नाम तमिलनाडु किया गया। |
| 24 | तेलंगाना | हैदराबाद | 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग होकर बना। |
| 25 | त्रिपुरा | अगरतला | 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य बना। |
| 26 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | 1950 में संयुक्त प्रांत का नाम उत्तर प्रदेश हुआ। |
| 27 | उत्तराखंड | देहरादून | 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग हुआ। |
| 28 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | पूर्वी भारत का महत्वपूर्ण राज्य। |
परीक्षा संबंधी सावधानी: आंध्र प्रदेश की राजधानी से संबंधित प्रशासनिक और विधायी व्यवस्थाओं में समय के साथ परिवर्तन हुए हैं। परीक्षा में राजधानी संबंधी नवीनतम प्रश्न के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना को प्राथमिकता दें।
केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक या उपराज्यपाल के माध्यम से संचालित किया जाता है। कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में विधानमंडल की विशेष व्यवस्था है।
| क्रम | केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी / प्रशासनिक केंद्र | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | श्री विजयपुरम | बंगाल की खाड़ी में स्थित; पूर्व नाम पोर्ट ब्लेयर था। |
| 2 | चंडीगढ़ | चंडीगढ़ | पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी भी है। |
| 3 | दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव | दमन | दो पूर्व केंद्रशासित प्रदेशों का 2020 में विलय हुआ। |
| 4 | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली | नई दिल्ली | विशेष संवैधानिक व्यवस्था वाला केंद्रशासित प्रदेश। |
| 5 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन) और जम्मू (शीतकालीन) | विधानमंडल की व्यवस्था वाला केंद्रशासित प्रदेश। |
| 6 | लद्दाख | लेह | विधानमंडल नहीं है। |
| 7 | लक्षद्वीप | कवरत्ती | अरब सागर में स्थित प्रवाल द्वीप समूह। |
| 8 | पुडुचेरी | पुडुचेरी | विधानमंडल वाला केंद्रशासित प्रदेश। |
| आधार | राज्य | केंद्रशासित प्रदेश |
|---|---|---|
| प्रशासन | सामान्यतः राज्य की निर्वाचित सरकार के माध्यम से। | संघ सरकार के अधीन संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार। |
| संवैधानिक प्रमुख | राज्यपाल। | सामान्यतः राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक या उपराज्यपाल। |
| मुख्यमंत्री | राज्यों में निर्वाचित सरकार का प्रमुख। | केवल उन केंद्रशासित प्रदेशों में जहाँ ऐसी सरकार की व्यवस्था है। |
| विधानमंडल | राज्यों में संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार विधानमंडल होता है। | कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में विधानमंडल है, जबकि अन्य में नहीं। |
| संवैधानिक स्थिति | संघीय व्यवस्था की प्रमुख इकाई। | संघ के अधीन विशेष प्रशासनिक व्यवस्था वाला क्षेत्र। |
राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के बीच अंतर केवल नाम का नहीं है। उनकी विधायी, कार्यपालिका और प्रशासनिक शक्तियाँ संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में निम्न तीन केंद्रशासित प्रदेशों में विधानमंडल की व्यवस्था है:
इनकी शक्तियाँ सामान्य राज्यों के समान पूरी तरह नहीं हैं। विशेष रूप से दिल्ली की संवैधानिक स्थिति अन्य केंद्रशासित प्रदेशों से अलग है।
लद्दाख में विधानमंडल नहीं है।
| वर्ष / तिथि | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1 अक्टूबर 1953 | आंध्र राज्य का गठन | भाषाई आधार पर गठित पहला राज्य। |
| 1956 | राज्य पुनर्गठन अधिनियम | राज्यों की सीमाओं और प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव। |
| 1 मई 1960 | महाराष्ट्र और गुजरात का गठन | बंबई राज्य का विभाजन। |
| 1 दिसंबर 1963 | नागालैंड राज्य बना | पूर्वोत्तर भारत का महत्वपूर्ण राज्य पुनर्गठन। |
| 1 नवंबर 1966 | हरियाणा का गठन | पंजाब के पुनर्गठन से संबंधित। |
| 25 जनवरी 1971 | हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बना | हिमालयी क्षेत्र में राज्य का दर्जा। |
| 21 जनवरी 1972 | मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा पूर्ण राज्य बने | पूर्वोत्तर राज्यों की संवैधानिक स्थिति में परिवर्तन। |
| 16 मई 1975 | सिक्किम भारत का राज्य बना | सिक्किम भारतीय संघ का पूर्ण राज्य बना। |
| 20 फरवरी 1987 | अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम पूर्ण राज्य बने | पूर्वोत्तर भारत में राज्य पुनर्गठन। |
| 30 मई 1987 | गोवा पूर्ण राज्य बना | गोवा भारत का 25वाँ राज्य बना। |
| 1 नवंबर 2000 | छत्तीसगढ़ का गठन | मध्य प्रदेश से अलग हुआ। |
| 9 नवंबर 2000 | उत्तराखंड का गठन | उत्तर प्रदेश से अलग हुआ; प्रारंभिक नाम उत्तरांचल था। |
| 15 नवंबर 2000 | झारखंड का गठन | बिहार से अलग हुआ। |
| 2 जून 2014 | तेलंगाना का गठन | आंध्र प्रदेश से अलग हुआ; भारत का 29वाँ राज्य बना। |
| 31 अक्टूबर 2019 | जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन | जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश बने। |
| 26 जनवरी 2020 | दो केंद्रशासित प्रदेशों का विलय | दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव एक केंद्रशासित प्रदेश बने। |
वर्ष 2000 में तीन नए राज्यों का गठन हुआ। यह तथ्य प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
| नया राज्य | मूल राज्य | गठन की तिथि | राजधानी |
|---|---|---|---|
| छत्तीसगढ़ | मध्य प्रदेश | 1 नवंबर 2000 | रायपुर |
| उत्तराखंड | उत्तर प्रदेश | 9 नवंबर 2000 | देहरादून |
| झारखंड | बिहार | 15 नवंबर 2000 | राँची |
तेलंगाना का गठन 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अंतर्गत हुआ। यह भारत का 29वाँ राज्य बना।
तेलंगाना राज्य आंदोलन का संबंध क्षेत्रीय पहचान, आर्थिक अवसरों, संसाधनों के वितरण और प्रशासनिक अपेक्षाओं से था।
हैदराबाद को पुनर्गठन कानून में निर्धारित संक्रमणकालीन अवधि के दौरान दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में रखा गया था। वह व्यवस्था स्थायी साझा राजधानी की व्यवस्था नहीं थी।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अंतर्गत 31 अक्टूबर 2019 से पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया:
यह परिवर्तन भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक मानचित्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव था।
26 जनवरी 2020 से दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को मिलाकर एक केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
इसका आधिकारिक नाम है: दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव।
इस विलय के बाद भारत में केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या 9 से घटकर 8 हो गई।
संसद को अनुच्छेद 3 के अंतर्गत निम्न कार्य करने की शक्ति प्राप्त है:
प्रक्रिया के मुख्य चरण:
महत्वपूर्ण: संबंधित राज्य के विधानमंडल की राय संसद पर बाध्यकारी नहीं होती। संसद उस राय को स्वीकार करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य नहीं है।
अनुच्छेद 3 के अंतर्गत विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक है।
भारत के राज्यों को अध्ययन की सुविधा के लिए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। यह वर्गीकरण सामान्य भौगोलिक समझ के लिए है; यह संविधान में निर्धारित औपचारिक वर्गीकरण नहीं है।
| क्षेत्र | उदाहरण के रूप में शामिल राज्य | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा | हिमालय, उत्तरी मैदान और कृषि क्षेत्र। |
| दक्षिण भारत | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु | प्रायद्वीपीय पठार, तटीय मैदान और विविध मानसूनी परिस्थितियाँ। |
| पूर्वी भारत | बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल | गंगा का मैदान, खनिज क्षेत्र और तटीय डेल्टा। |
| पश्चिमी भारत | राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा | मरुस्थल, पश्चिमी तट, पठार और औद्योगिक क्षेत्र। |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ | पठारी क्षेत्र, वन और खनिज संसाधन। |
| पूर्वोत्तर भारत | असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम | पर्वतीय स्थलाकृति, भारी वर्षा और जैव विविधता। |
पूर्वोत्तर भारत भौगोलिक, सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में आठ राज्य हैं: असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम।
पूर्वोत्तर क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ भूटान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश सहित पड़ोसी देशों से संपर्क स्थापित करती हैं। सिक्किम की सीमा नेपाल से भी लगती है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर मुख्य भारतीय भूभाग और पूर्वोत्तर भारत के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल-संपर्क क्षेत्र है। इसकी भौगोलिक स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा और परिवहन के लिए विशेष महत्व रखती है।
हिमालयी राज्यों में पर्वतीय स्थलाकृति, हिमनद, नदियों के उद्गम, वन, जैव विविधता और जलविद्युत क्षमता प्रमुख विशेषताएँ हैं।
इन क्षेत्रों में भूस्खलन, भूकंपीय सक्रियता, बादल फटना, अचानक बाढ़ और हिमनदीय झीलों से संबंधित जोखिम भी पाए जाते हैं। इसलिए यहाँ विकास योजनाओं में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आपदा जोखिम को ध्यान में रखना आवश्यक है।
भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर और पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी स्थित है। तटीय राज्यों का महत्व समुद्री व्यापार, बंदरगाहों, मत्स्य पालन, पर्यटन, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के कारण है।
प्रमुख तटीय राज्य:
तटीय क्षेत्रों में चक्रवात, समुद्री कटाव, तटीय बाढ़ और समुद्र-स्तर में वृद्धि जैसी चुनौतियाँ भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत के दो प्रमुख द्वीपीय केंद्रशासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप हैं।
राज्यों में प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक इकाइयाँ बनाई जाती हैं। इनकी संरचना राज्य के अनुसार अलग हो सकती है।
ध्यान दें: जिला, तहसील, विकासखंड और स्थानीय निकायों की संरचना पूरे भारत में समान नहीं है।
भारत में राज्य पुनर्गठन केवल सीमाओं को बदलने की प्रक्रिया नहीं है। इसका संबंध भाषाई पहचान, क्षेत्रीय आकांक्षाओं, प्रशासनिक दक्षता, संसाधनों के वितरण और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से भी है।
भाषाई राज्यों के गठन ने अनेक क्षेत्रों में लोगों को अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था प्राप्त करने का अवसर दिया। दूसरी ओर, नए राज्यों के निर्माण में वित्तीय संसाधन, प्रशासनिक क्षमता, जल और खनिज संसाधनों का वितरण तथा अंतरराज्यीय सहयोग जैसे प्रश्न भी महत्वपूर्ण होते हैं।
भारत में राज्यों का पुनर्गठन भारतीय संघवाद की अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक ढाँचे के भीतर स्थान देकर क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से संबोधित किया गया।
हालांकि राज्य पुनर्गठन से प्रशासनिक सुविधा और प्रतिनिधित्व में सुधार की संभावनाएँ पैदा होती हैं, लेकिन नए राज्यों की वित्तीय व्यवहार्यता, प्रशासनिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों का वितरण और अंतरराज्यीय संबंध भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए नए राज्य के गठन या सीमाओं के पुनर्गठन पर विचार करते समय क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता, सुशासन, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन आवश्यक है।
| विषय | याद रखने वाली मुख्य बात |
|---|---|
| भारत का संवैधानिक स्वरूप | राज्यों का संघ — अनुच्छेद 1 |
| नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना | अनुच्छेद 2 |
| राज्यों का गठन और सीमा परिवर्तन | अनुच्छेद 3 |
| पूरक प्रावधान | अनुच्छेद 4 |
| आंध्र राज्य | 1953 |
| राज्य पुनर्गठन अधिनियम | 1956 |
| सिक्किम | 1975 में भारत का राज्य बना |
| वर्ष 2000 के नए राज्य | छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड |
| तेलंगाना | 2014 |
| जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन | 2019 |
| केंद्रशासित प्रदेशों का विलय | 2020 में दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव |
| वर्तमान संख्या | 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश |
भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का वर्तमान स्वरूप ऐतिहासिक एकीकरण, संवैधानिक प्रावधानों और समय-समय पर हुए प्रशासनिक पुनर्गठन का परिणाम है।
UPSC की तैयारी के लिए केवल राज्यों और राजधानियों को याद करना पर्याप्त नहीं है। अनुच्छेद 1 से 4, राज्य पुनर्गठन आयोग, 1956 का अधिनियम, प्रमुख गठन-वर्ष और राज्य-केंद्रशासित प्रदेश के बीच संवैधानिक अंतर को भी समझना आवश्यक है।
याद रखने की मुख्य कड़ी: संविधान → राज्य पुनर्गठन → गठन की तिथियाँ → राजधानी → प्रशासनिक स्थिति → संघवाद