ज्वालामुखिता एवं भूकंप

Volcanism and Earthquakes — पृथ्वी की आंतरिक शक्तियाँ, प्लेट विवर्तनिकी एवं आपदा प्रबंधन

1. ज्वालामुखिता एवं भूकंप का परिचय

पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है। इसकी आंतरिक ऊष्मा, चट्टानों में उत्पन्न तनाव और स्थलमंडलीय प्लेटों की गति के कारण पृथ्वी की सतह पर अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। पर्वत निर्माण, ज्वालामुखी, भूकंप और महासागरीय गर्त जैसी घटनाएँ पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता से संबंधित हैं।

ज्वालामुखिता (Volcanism) उन प्रक्रियाओं का व्यापक समूह है जिनमें मैग्मा पृथ्वी के भीतर गति करता है, चट्टानों में प्रवेश करता है अथवा पृथ्वी की सतह पर निकलता है।

भूकंप (Earthquake) पृथ्वी के भीतर संचित ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न कंपन है। अधिकांश बड़े भूकंप भ्रंशों पर चट्टानों के अचानक खिसकने से संबंधित होते हैं।

इन दोनों घटनाओं को समझने के लिए प्लेट विवर्तनिकी, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानों के गुण और भूगर्भीय प्रक्रियाओं का अध्ययन आवश्यक है।

2. पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा एवं आंतरिक शक्तियाँ

पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा के प्रमुख स्रोत हैं:

पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा और गुरुत्वीय ऊर्जा, मेंटल में होने वाली गति तथा प्लेटों की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं। प्लेटों की गति में स्लैब पुल (Slab Pull), रिज पुश (Ridge Push) और मेंटल की गति जैसी प्रक्रियाएँ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ध्यान दें: मेंटल को पूरी तरह तरल मानना गलत है। इसका अधिकांश भाग ठोस है, लेकिन भूवैज्ञानिक समयमान पर यह धीरे-धीरे विकृत और प्रवाहित हो सकता है।

3. प्लेट विवर्तनिकी एवं ज्वालामुखिता

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics Theory) के अनुसार पृथ्वी का कठोर बाहरी भाग, जिसे स्थलमंडल (Lithosphere) कहते हैं, कई बड़ी और छोटी प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें नीचे स्थित अपेक्षाकृत कमजोर एस्थेनोस्फीयर के ऊपर गति करती हैं।

प्लेट सीमाओं के तीन प्रमुख प्रकार हैं:

प्लेट सीमा प्लेटों की गति प्रमुख भूगर्भीय प्रक्रिया सामान्य परिणाम
अपसारी (Divergent) प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं। मैग्मा ऊपर उठता है और नई भूपर्पटी बन सकती है। मध्य-महासागरीय पर्वतमालाएँ, दरारी ज्वालामुखिता और उथले भूकंप।
अभिसारी (Convergent) प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं। सबडक्शन या महाद्वीपीय टक्कर। महासागरीय गर्त, ज्वालामुखीय चाप, पर्वत और उथले से गहरे भूकंप।
रूपांतर (Transform) प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर खिसकती हैं। भ्रंशों पर क्षैतिज विस्थापन। मुख्यतः उथले भूकंप; सामान्यतः ज्वालामुखिता कम।

सबडक्शन (Subduction): जब अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाली प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँसती है, तो इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहते हैं। यह महासागरीय गर्तों, भूकंपों और अनेक ज्वालामुखीय चापों के निर्माण से संबंधित है।

महत्त्वपूर्ण अपवाद: सभी अभिसारी सीमाओं पर ज्वालामुखी नहीं बनते। उदाहरण के लिए, दो महाद्वीपीय प्लेटों की टक्कर से हिमालय जैसे पर्वत बनते हैं, लेकिन वहाँ सामान्य सबडक्शन-ज्वालामुखीय चाप जैसी स्थिति नहीं होती।

4. ज्वालामुखिता (Volcanism) क्या है?

पृथ्वी के भीतर मौजूद पिघली हुई या आंशिक रूप से पिघली चट्टानी सामग्री को मैग्मा (Magma) कहते हैं। जब यह पृथ्वी की सतह पर निकलती है, तो इसे लावा (Lava) कहा जाता है।

मैग्मा के ऊपर उठने, चट्टानों में प्रवेश करने, भीतर जमने या सतह पर निकलने से संबंधित प्रक्रियाएँ ज्वालामुखिता का हिस्सा हैं। सतह पर मैग्मा निकलने की घटना को ज्वालामुखी उद्गार (Volcanic Eruption) कहा जाता है।

5. मैग्मा और लावा में अंतर

आधार मैग्मा (Magma) लावा (Lava)
स्थिति पृथ्वी के भीतर पृथ्वी की सतह पर निकलने के बाद
संघटन पिघली चट्टानी सामग्री, क्रिस्टल और घुली गैसें हो सकती हैं। सतह पर निकली चट्टानी सामग्री, जिसमें गैसें निकलने लगती हैं।
गैसों का व्यवहार दाब के कारण गैसें घुली रह सकती हैं। दाब घटने पर गैसें बाहर निकल सकती हैं।
महत्त्व अंतर्वेधी चट्टानों और ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं का स्रोत। लावा प्रवाह और बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानों का निर्माण।

6. मैग्मा की श्यानता और उद्गार की प्रकृति

श्यानता (Viscosity) किसी द्रव के प्रवाह के प्रति प्रतिरोध को दर्शाती है। मैग्मा की श्यानता उसके तापमान, सिलिका की मात्रा और क्रिस्टलों तथा गैसों की स्थिति से प्रभावित होती है।

UPSC तथ्य: अधिक श्यानता गैसों को बाहर निकलने से रोक सकती है, जिससे मैग्मा में दाब बढ़ सकता है। फिर भी किसी उद्गार की तीव्रता केवल सिलिका पर निर्भर नहीं करती; गैसों की मात्रा, मैग्मा की गति और अन्य भूगर्भीय परिस्थितियाँ भी महत्त्वपूर्ण हैं।

7. सक्रियता के आधार पर ज्वालामुखियों के प्रकार

प्रकार अर्थ महत्त्वपूर्ण स्पष्टीकरण
सक्रिय (Active) ऐसा ज्वालामुखी जिसमें वर्तमान में उद्गार हो रहा हो या हाल के भूवैज्ञानिक इतिहास में उद्गार हुआ हो। सक्रियता का निर्धारण केवल वर्तमान में लावा निकलने से नहीं होता।
सुप्त (Dormant) ऐसा ज्वालामुखी जो वर्तमान में शांत हो, लेकिन भविष्य में फिर सक्रिय हो सकता है। शांत रहना हमेशा के लिए निष्क्रिय होने का प्रमाण नहीं है।
मृत या विलुप्त (Extinct) ऐसा ज्वालामुखी जिसके पुनः उद्गार की संभावना भूवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत कम मानी जाती है। इस वर्गीकरण में अनिश्चितता हो सकती है; केवल लंबे समय तक शांत रहने से ज्वालामुखी मृत सिद्ध नहीं होता।

8. आकार एवं संरचना के आधार पर ज्वालामुखियों के प्रकार

1. शील्ड ज्वालामुखी (Shield Volcano)

इनका आधार विस्तृत तथा ढाल सामान्यतः कम तीव्र होती है। कम श्यानता वाला बेसाल्टिक लावा दूर तक फैलकर इनका निर्माण कर सकता है। उदाहरण: हवाई द्वीपों के मौना लोआ और किलाउआ।

2. संयुक्त या स्तरीय ज्वालामुखी (Composite / Stratovolcano)

इनमें लावा, राख और अन्य ज्वालामुखीय पदार्थों की परतें जमा होती हैं। इनसे शांत लावा प्रवाह से लेकर अत्यधिक विस्फोटक उद्गार तक हो सकते हैं। उदाहरण: माउंट फूजी और माउंट विसुवियस।

3. सिंडर कोन (Cinder Cone)

ज्वालामुखीय टुकड़ों, लैपिली और राख के वेंट के आसपास जमा होने से बनने वाला सामान्यतः छोटा, शंक्वाकार स्थलरूप।

4. लावा डोम (Lava Dome)

अधिक श्यानता वाले लावा के वेंट के आसपास धीरे-धीरे जमा होने से गुंबदाकार स्थलरूप बन सकता है। इसका ढहना कभी-कभी खतरनाक पाइरोक्लास्टिक प्रवाह उत्पन्न कर सकता है।

9. उद्गार के स्वरूप के आधार पर ज्वालामुखिता

दक्कन ट्रैप (Deccan Traps) भारत में प्राचीन विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाह का प्रमुख उदाहरण है। इसका निर्माण क्रिटेशियस काल के अंतिम भाग के आसपास व्यापक ज्वालामुखीय गतिविधि से हुआ। इसे केवल एक अकेले विस्फोट का परिणाम मानना उचित नहीं है।

10. ज्वालामुखियों का वैश्विक वितरण

विश्व में ज्वालामुखिता मुख्यतः तीन भूगर्भीय परिस्थितियों से जुड़ी है:

11. प्रशांत अग्नि वलय (Ring of Fire)

प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला ज्वालामुखीय एवं भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र प्रशांत अग्नि वलय कहलाता है। इसका बड़ा भाग प्रशांत प्लेट के आसपास की अभिसारी सीमाओं और सबडक्शन क्षेत्रों से जुड़ा है।

जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड और उत्तर तथा दक्षिण अमेरिका के प्रशांत तटीय क्षेत्र इसके महत्त्वपूर्ण भाग हैं।

ध्यान दें: Ring of Fire कोई पूर्णतः सतत वृत्त नहीं है। इसमें कई अलग-अलग प्लेट सीमाएँ और भूगर्भीय क्षेत्र शामिल हैं।

12. हॉटस्पॉट (Hotspot)

कुछ ज्वालामुखी प्लेट सीमाओं से दूर स्थित होते हैं। इनके पीछे मेंटल के भीतर से उठने वाले गर्म पदार्थ, मेंटल की असमानताओं या अन्य स्थानीय भूगर्भीय प्रक्रियाओं की भूमिका हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों को सामान्यतः हॉटस्पॉट कहा जाता है।

हवाई द्वीप हॉटस्पॉट से संबंधित ज्वालामुखीय द्वीपों का प्रसिद्ध उदाहरण है। प्रशांत प्लेट के हॉटस्पॉट के ऊपर गति करने से द्वीपों की एक श्रृंखला विकसित हुई है।

13. ज्वालामुखीय पदार्थ

पदार्थ अर्थ विशेषता
लावा (Lava) सतह पर निकली पिघली चट्टानी सामग्री। ठंडा होने पर आग्नेय चट्टान बनती है।
ज्वालामुखीय राख (Volcanic Ash) व्यास 2 मिलीमीटर से कम वाले महीन ज्वालामुखीय कण। यह सामान्य लकड़ी या कोयले की राख नहीं, बल्कि मुख्यतः चट्टानी और खनिज कण होते हैं।
लैपिली (Lapilli) लगभग 2 से 64 मिलीमीटर आकार के ज्वालामुखीय कण। उद्गार के दौरान निकले टुकड़े।
ज्वालामुखीय बम (Volcanic Bombs) उद्गार के समय निकले 64 मिलीमीटर से बड़े पिघले या आंशिक रूप से पिघले टुकड़े। हवा में उड़ते समय इनका आकार बदल सकता है।
ज्वालामुखीय गैसें जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि। स्वास्थ्य, वायु गुणवत्ता और जलवायु को प्रभावित कर सकती हैं।

14. ज्वालामुखीय स्थलरूप

क्रेटर और कैल्डेरा में अंतर: क्रेटर सामान्यतः ज्वालामुखी के मुख से संबंधित छोटा अवसाद होता है, जबकि कैल्डेरा प्रायः बहुत बड़ा अवसाद होता है, जिसका निर्माण मैग्मा कक्ष के ऊपर की संरचना के धँसने से हो सकता है।

15. ज्वालामुखियों के लाभ एवं हानियाँ

सकारात्मक प्रभाव नकारात्मक प्रभाव
कुछ क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण। लावा प्रवाह से बस्तियों, कृषि और आधारभूत संरचना को नुकसान।
भूतापीय ऊर्जा का उपयोग। राख और गैसों से स्वास्थ्य तथा वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव।
कुछ खनिज संसाधनों का निर्माण। पाइरोक्लास्टिक प्रवाह और लहार से व्यापक विनाश।
नए भू-दृश्य और द्वीपों का निर्माण। विमानन, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान।
पर्यटन और वैज्ञानिक अध्ययन के अवसर। बड़े विस्फोटों से अस्थायी वैश्विक जलवायु प्रभाव संभव।

लहार (Lahar) ज्वालामुखीय राख, चट्टानी टुकड़ों और पानी का तेजी से बहने वाला मिश्रण है। यह नदी घाटियों में दूर तक पहुँचकर बस्तियों और पुलों को नुकसान पहुँचा सकता है।

पाइरोक्लास्टिक प्रवाह (Pyroclastic Flow) गर्म गैसों, राख और चट्टानी टुकड़ों का अत्यंत तेज गति से नीचे की ओर बहने वाला मिश्रण है। यह ज्वालामुखीय खतरों में सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक है।

16. ज्वालामुखीय विस्फोट और जलवायु

बड़े ज्वालामुखीय विस्फोटों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड यदि समतापमंडल (Stratosphere) तक पहुँच जाए, तो उससे सल्फेट एरोसोल बन सकते हैं। ये सूर्य के विकिरण के एक हिस्से को परावर्तित कर कुछ समय के लिए वैश्विक औसत तापमान घटा सकते हैं।

यह प्रभाव सामान्यतः अस्थायी होता है। इसे मानव गतिविधियों से होने वाले दीर्घकालिक वैश्विक तापन के समान नहीं समझना चाहिए।

17. भूकंप (Earthquake) क्या है?

जब पृथ्वी की चट्टानों में संचित तनाव के कारण किसी भ्रंश पर अचानक विस्थापन होता है, तो ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है। इन तरंगों से पृथ्वी में कंपन उत्पन्न होता है, जिसे भूकंप कहते हैं।

अधिकांश बड़े भूकंप विवर्तनिक गतिविधियों से संबंधित होते हैं। फिर भी भूकंप केवल प्लेट सीमाओं पर ही नहीं आते; प्लेटों के आंतरिक भाग में भी पुराने भ्रंश दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।

18. भूकंप का फोकस और अधिकेंद्र

अवधारणा अर्थ याद रखने योग्य तथ्य
फोकस (Focus / Hypocentre) पृथ्वी के भीतर वह स्थान जहाँ भ्रंश पर विस्थापन और भूकंपीय ऊर्जा का मुक्त होना शुरू होता है। भूकंप का उद्गम पृथ्वी के भीतर होता है।
अधिकेंद्र (Epicentre) फोकस के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु। यह सतह पर स्थित होता है।
भूकंप की गहराई फोकस और पृथ्वी की सतह के बीच की गहराई। उथले, मध्यम और गहरे भूकंपों के प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।

ध्यान दें: अधिकेंद्र के निकट हमेशा सबसे अधिक क्षति हो, यह आवश्यक नहीं है। क्षति का संबंध भूकंप की गहराई, परिमाण, स्थानीय मिट्टी, भवनों की गुणवत्ता और जनसंख्या घनत्व से भी होता है।

19. भूकंप की गहराई के आधार पर वर्गीकरण

भूकंपों को फोकस की गहराई के आधार पर सामान्यतः निम्न वर्गों में बाँटा जाता है:

ये प्रचलित भूकंप-विज्ञान संबंधी वर्गीकरण हैं। गहरे भूकंप विशेष रूप से सबडक्शन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँसती है।

20. भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves)

भूकंप के दौरान ऊर्जा अलग-अलग प्रकार की तरंगों के रूप में फैलती है। मुख्यतः इन्हें आंतरिक तरंगों और सतही तरंगों में बाँटा जाता है।

तरंग प्रकृति माध्यम मुख्य विशेषता
P-Waves (Primary Waves) अनुदैर्ध्य संपीड़न-विस्तार तरंगें। ठोस, द्रव और गैस। सामान्यतः सबसे तेज भूकंपीय तरंगें; सबसे पहले दर्ज होती हैं।
S-Waves (Secondary Waves) अनुप्रस्थ तरंगें। ठोस माध्यम; द्रव में नहीं फैलतीं। P-Waves से धीमी होती हैं।
सतही तरंगें (Surface Waves) पृथ्वी की सतह के पास फैलने वाली तरंगें। पृथ्वी की सतह के आसपास। कई परिस्थितियों में व्यापक क्षति का प्रमुख कारण।

UPSC का महत्त्वपूर्ण तथ्य: S-Waves द्रव बाह्य कोर से होकर नहीं गुजरतीं। इस तथ्य ने पृथ्वी के बाह्य कोर की द्रव अवस्था को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

P-Waves और S-Waves के आगमन समय में अंतर का उपयोग भूकंप केंद्र की दूरी का अनुमान लगाने में किया जा सकता है। विभिन्न भूकंपमापी केंद्रों के आँकड़ों की सहायता से अधिकेंद्र का निर्धारण किया जाता है।

21. भूकंप का परिमाण और तीव्रता

आधार परिमाण (Magnitude) तीव्रता (Intensity)
अर्थ भूकंप के स्रोत से मुक्त हुई ऊर्जा से संबंधित माप। किसी विशेष स्थान पर भूकंप के कंपन और प्रभाव का आकलन।
क्षेत्रीय अंतर एक भूकंप के लिए सामान्यतः एक परिमाण निर्धारित किया जाता है। एक ही भूकंप की तीव्रता अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती है।
मापन आधुनिक भूकंप विज्ञान में Moment Magnitude (Mw) व्यापक रूप से उपयोग होता है। Modified Mercalli Intensity (MMI) जैसी प्रणालियाँ उपयोग की जाती हैं।
मुख्य आधार भूकंपीय स्रोत और ऊर्जा। कंपन का अनुभव, भवनों पर प्रभाव और क्षति।

रिक्टर पैमाना (Richter Scale) ऐतिहासिक रूप से भूकंप के परिमाण के मापन के लिए प्रसिद्ध है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में बड़े भूकंपों के लिए Moment Magnitude Scale अधिक उपयोगी है।

याद रखें: रिक्टर पैमाना और मर्केली तीव्रता पैमाना एक ही चीज नहीं हैं। परिमाण स्रोत से संबंधित है, जबकि तीव्रता किसी स्थान पर महसूस किए गए प्रभाव को दर्शाती है।

22. भूकंप के प्रमुख कारण

23. भ्रंश (Fault) और भूकंप

चट्टानों में दरार या टूटे हुए क्षेत्र के दोनों ओर चट्टानी खंडों का सापेक्ष विस्थापन होने पर उसे भ्रंश (Fault) कहा जाता है। भ्रंशों पर तनाव जमा हो सकता है और अचानक विस्थापन होने पर भूकंप उत्पन्न हो सकता है।

भ्रंश का प्रकार प्रमुख बल सामान्य विस्थापन
सामान्य भ्रंश (Normal Fault) तनन (Tension) लटकता हुआ खंड सामान्यतः नीचे की ओर जाता है।
उत्क्रम भ्रंश (Reverse Fault) संपीड़न (Compression) लटकता हुआ खंड सामान्यतः ऊपर की ओर जाता है।
थ्रस्ट भ्रंश (Thrust Fault) संपीड़न कम कोण वाला उत्क्रम भ्रंश।
स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश (Strike-slip Fault) क्षैतिज कतरनी (Shear) मुख्यतः क्षैतिज विस्थापन।

24. भूकंप का वैश्विक वितरण

विश्व में भूकंपों की प्रमुख पट्टियाँ हैं:

भूकंपों का वितरण प्लेट सीमाओं से गहराई से जुड़ा है, लेकिन पुराने भ्रंशों, स्थानीय भूगर्भीय संरचनाओं और मानव गतिविधियों के कारण प्लेटों के अंदर भी भूकंप आ सकते हैं।

25. भारत में भूकंप

भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में गति करते हुए यूरेशियाई प्लेट से अभिसरित हो रही है। इस टक्कर और उससे उत्पन्न संपीड़न के कारण हिमालय तथा उसके आसपास का क्षेत्र सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है।

भारत में भूकंप जोखिम के प्रमुख क्षेत्र हैं:

भारत के किसी क्षेत्र को केवल उसकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर सुरक्षित नहीं माना जा सकता। स्थानीय मिट्टी, भूगर्भीय संरचना, भवन निर्माण और भूकंपीय इतिहास भी जोखिम को प्रभावित करते हैं।

26. भारत के भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zones)

भारत में भूकंपरोधी संरचनाओं के डिजाइन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards — BIS) के भूकंपीय मानकों का उपयोग किया जाता है। IS 1893 (Part 1):2016 के क्षेत्रीकरण में भारत को Zone II, Zone III, Zone IV और Zone V में बाँटा गया है।

क्षेत्र सामान्य जोखिम श्रेणी UPSC के लिए महत्त्व
Zone II अपेक्षाकृत कम भूकंपीय जोखिम। दिए गए चार क्षेत्रों में सबसे कम जोखिम वाली श्रेणी।
Zone III मध्यम भूकंपीय जोखिम। निर्माण में उपयुक्त भूकंपरोधी मानकों का पालन आवश्यक।
Zone IV उच्च भूकंपीय जोखिम। संरचनात्मक सुरक्षा और जोखिम न्यूनीकरण का विशेष महत्त्व।
Zone V अत्यधिक भूकंपीय जोखिम। इन चार क्षेत्रों में सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी।

परीक्षा में सावधानी: भूकंपीय क्षेत्रीकरण का मानचित्र किसी क्षेत्र के भूकंप जोखिम का तकनीकी वर्गीकरण है। इसका अर्थ यह नहीं कि Zone V में हर समय बड़े भूकंप आते हैं या Zone II में कभी भूकंप नहीं आ सकता।

वर्तमानता संबंधी नोट: भूकंपीय मानकों में संशोधन हो सकते हैं। परीक्षा के लिए अपने अध्ययन वर्ष में लागू BIS मानक और आधिकारिक क्षेत्रीकरण की पुष्टि करना उपयोगी है।

27. सुनामी (Tsunami)

समुद्र के भीतर बड़े पैमाने पर जल के अचानक विस्थापन से उत्पन्न लंबी तरंगों की श्रृंखला को सुनामी (Tsunami) कहा जाता है।

सुनामी के प्रमुख कारण हैं:

अधिकांश विनाशकारी भूकंप-जनित सुनामियाँ समुद्र के नीचे होने वाले शक्तिशाली उथले भूकंपों से जुड़ी होती हैं, जिनमें समुद्र तल का ऊर्ध्वाधर विस्थापन होता है।

28. खुले समुद्र और तट के पास सुनामी में अंतर

आधार खुला समुद्र उथला तटीय क्षेत्र
गति बहुत अधिक हो सकती है। जल की गहराई कम होने से घटती है।
तरंग की ऊँचाई अक्सर अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। जल की गहराई और तटीय आकृति के अनुसार काफी बढ़ सकती है।
खतरा खुले समुद्र में जहाजों को कभी-कभी बहुत कम परिवर्तन महसूस होता है। तटीय बाढ़, तेज जलधारा और बड़े पैमाने पर विनाश संभव।

महत्त्वपूर्ण अंतर: सुनामी सामान्य समुद्री ज्वार (Tide) नहीं है। ज्वार मुख्यतः चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित है, जबकि सुनामी बड़े पैमाने पर जल विस्थापन से उत्पन्न होती है।

29. ज्वालामुखिता और भूकंप का संबंध

ज्वालामुखीय क्षेत्रों में मैग्मा की गति और दाब में बदलाव से भूकंपीय गतिविधि बढ़ सकती है। दूसरी ओर, प्लेट सीमाओं पर होने वाली विवर्तनिक गतिविधियाँ भूकंप और ज्वालामुखिता दोनों के वितरण को प्रभावित कर सकती हैं।

प्लेट सीमा भूकंप की सामान्य प्रकृति ज्वालामुखिता की सामान्य स्थिति
अपसारी सामान्यतः उथले भूकंप। मैग्मा के ऊपर उठने के कारण प्रायः ज्वालामुखिता।
अभिसारी — सबडक्शन उथले से गहरे भूकंप तक संभव। कई क्षेत्रों में ज्वालामुखीय चाप बनते हैं।
अभिसारी — महाद्वीपीय टक्कर शक्तिशाली भूकंप संभव। सामान्य सबडक्शन-ज्वालामुखीय चाप आवश्यक नहीं।
रूपांतर उथले भूकंप सामान्य। सामान्यतः सीमित ज्वालामुखिता।
हॉटस्पॉट स्थानीय भूकंपीय गतिविधि संभव। प्लेट सीमा से दूर भी ज्वालामुखी बन सकते हैं।

निष्कर्ष: प्रत्येक भूकंप ज्वालामुखी के कारण नहीं आता और प्रत्येक ज्वालामुखी उद्गार के साथ बड़ा भूकंप होना आवश्यक नहीं है।

30. विश्व के महत्त्वपूर्ण ज्वालामुखी

ज्वालामुखी स्थान भौगोलिक महत्त्व
माउंट फूजी (Mount Fuji) जापान प्रसिद्ध स्तरीय ज्वालामुखी।
माउंट विसुवियस (Mount Vesuvius) इटली प्राचीन पोम्पेई नगर के विनाश से संबंधित ऐतिहासिक उद्गार के लिए प्रसिद्ध।
माउंट एटना (Mount Etna) सिसिली, इटली यूरोप के प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक।
मौना लोआ (Mauna Loa) हवाई, अमेरिका विशाल शील्ड ज्वालामुखी।
क्राकाटोआ (Krakatau) इंडोनेशिया 1883 के विनाशकारी उद्गार के लिए प्रसिद्ध।
माउंट सेंट हेलेंस (Mount St. Helens) अमेरिका 1980 के बड़े विस्फोट के लिए प्रसिद्ध।

31. भारत के प्रमुख ज्वालामुखीय उदाहरण

बैरन द्वीप (Barren Island): अंडमान सागर में स्थित भारत का प्रसिद्ध सक्रिय ज्वालामुखीय उदाहरण है। यह अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के ज्वालामुखीय चाप का हिस्सा है।

नारकोंडम द्वीप (Narcondam Island): अंडमान सागर में स्थित ज्वालामुखीय उत्पत्ति का द्वीप है। इसे सामान्यतः सुप्त ज्वालामुखी के उदाहरण के रूप में पढ़ा जाता है।

बाराटांग का मड वोल्केनो (Mud Volcano): यह कीचड़ और गैसों के बाहर निकलने से संबंधित भूवैज्ञानिक संरचना है। इसे बैरन द्वीप जैसे मैग्माई ज्वालामुखी के समान नहीं समझना चाहिए।

दक्कन ट्रैप: प्राचीन विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बना विस्तृत ज्वालामुखीय भू-भाग है।

32. भूकंप से होने वाली प्रमुख क्षति

33. द्रवीकरण (Liquefaction)

ढीली और जल-संतृप्त मिट्टी में तीव्र भूकंपीय कंपन के दौरान छिद्रों में जल-दाब बढ़ सकता है। इससे मिट्टी की प्रभावी तनाव-स्थिति और वहन क्षमता घट सकती है तथा वह अस्थायी रूप से द्रव जैसी व्यवहार करने लग सकती है। इस घटना को द्रवीकरण कहते हैं।

यह जोखिम विशेष रूप से ढीली, जल-संतृप्त रेतीली मिट्टी और कुछ अन्य संवेदनशील निक्षेपों में महत्त्वपूर्ण है। इससे भवनों का झुकना, जमीन का बैठना और भूमिगत संरचनाओं को नुकसान हो सकता है।

34. भूकंप जोखिम न्यूनीकरण (Earthquake Risk Reduction)

35. भूकंप के समय सुरक्षा के उपाय

यदि आप किसी भवन के अंदर हैं:

यदि आप खुले स्थान में हैं:

यदि तटीय क्षेत्र में तेज या लंबे समय तक भूकंप महसूस हो: समुद्र के पीछे हटने या आधिकारिक चेतावनी की प्रतीक्षा किए बिना, जहाँ स्थानीय सुनामी जोखिम हो, वहाँ ऊँचे स्थान या निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र की ओर जाएँ और स्थानीय आपदा प्रबंधन निर्देशों का पालन करें।

36. UPSC के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य

37. सामान्य गलतियाँ — Common Mistakes

38. त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

अवधारणा एक पंक्ति में याद रखें
मैग्मा पृथ्वी के भीतर पिघली या आंशिक रूप से पिघली चट्टानी सामग्री।
लावा पृथ्वी की सतह पर निकली मैग्माई सामग्री।
सबडक्शन एक प्लेट का दूसरी प्लेट के नीचे धँसना।
Ring of Fire प्रशांत महासागर के आसपास का व्यापक ज्वालामुखीय-भूकंपीय क्षेत्र।
हॉटस्पॉट प्लेट सीमा से दूर भी ज्वालामुखीय गतिविधि उत्पन्न कर सकने वाला क्षेत्र।
फोकस पृथ्वी के भीतर भूकंप का उद्गम क्षेत्र।
अधिकेंद्र फोकस के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह का बिंदु।
P-Waves सबसे तेज आंतरिक तरंगें; ठोस, द्रव और गैसों से गुजर सकती हैं।
S-Waves अनुप्रस्थ आंतरिक तरंगें; द्रव से नहीं गुजरतीं।
Magnitude भूकंप के स्रोत से मुक्त ऊर्जा से संबंधित माप।
Intensity किसी स्थान पर कंपन और प्रभाव का आकलन।
दक्कन ट्रैप प्राचीन विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बना क्षेत्र।
बैरन द्वीप भारत का प्रसिद्ध सक्रिय ज्वालामुखीय उदाहरण।
सुनामी समुद्र में बड़े पैमाने पर जल विस्थापन से उत्पन्न तरंग श्रृंखला।

39. विश्लेषण: UPSC मुख्य परीक्षा के लिए

ज्वालामुखिता और भूकंप पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता के महत्त्वपूर्ण परिणाम हैं। प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत इनके वैश्विक वितरण को समझने के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक ढाँचा प्रदान करता है। प्लेट सीमाओं का प्रकार, चट्टानों की प्रकृति और मैग्मा की विशेषताएँ इन घटनाओं के स्वरूप को प्रभावित करती हैं।

भारत के संदर्भ में हिमालय, पूर्वोत्तर भारत, कच्छ और अंडमान-निकोबार क्षेत्र भूकंपीय जोखिम के अध्ययन के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आधारभूत संरचना के विस्तार के कारण भूकंपरोधी निर्माण, भूमि उपयोग नियोजन और स्थानीय जोखिम आकलन की आवश्यकता बढ़ जाती है।

इन प्राकृतिक घटनाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इनके प्रभावों को वैज्ञानिक जोखिम मानचित्रण, सुरक्षित भवन निर्माण, जन-जागरूकता, प्रभावी चेतावनी व्यवस्था और त्वरित आपदा प्रतिक्रिया से कम किया जा सकता है। इसलिए आपदा प्रबंधन में केवल खतरे का अध्ययन पर्याप्त नहीं है; जोखिम के साथ-साथ संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया क्षमता को समझना भी आवश्यक है।

40. निष्कर्ष

ज्वालामुखिता और भूकंप का अध्ययन केवल प्राकृतिक आपदाओं को समझने तक सीमित नहीं है। यह प्लेट विवर्तनिकी, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, पर्वत निर्माण, महासागरीय गर्त, ज्वालामुखीय स्थलरूप और भू-जोखिम के अध्ययन से भी जुड़ा है।

UPSC की तैयारी के लिए प्लेट सीमाओं, ज्वालामुखियों के प्रकार, P-Waves और S-Waves, फोकस एवं अधिकेंद्र, परिमाण एवं तीव्रता, भारत के भूकंपीय क्षेत्रों, सुनामी और आपदा प्रबंधन को आपस में जोड़कर समझना चाहिए।