मध्यकालीन भारतीय इतिहास में राजनीतिक सत्ता के परिवर्तन, क्षेत्रीय राज्यों का उदय, प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विकास, व्यापार-वाणिज्य, धार्मिक आंदोलनों तथा कला और स्थापत्य के विस्तार का अध्ययन किया जाता है। इस काल को समझने के लिए विभिन्न राजवंशों, उनकी नीतियों और समाज पर उनके प्रभाव का अध्ययन आवश्यक है।
भारतीय इतिहास में मध्यकाल की समय-सीमा निर्धारित करने के लिए इतिहासकार अलग-अलग मानदंडों का उपयोग करते हैं। अध्ययन की सुविधा के लिए यहाँ प्रारंभिक मध्यकाल, दिल्ली सल्तनत, विजयनगर एवं बहमनी राज्यों, मुगल साम्राज्य तथा क्षेत्रीय शक्तियों से संबंधित प्रमुख विषय शामिल किए गए हैं।
मध्यकालीन इतिहास से संबंधित प्रश्नों में राजवंशों के कालक्रम, शासकों की नीतियों, प्रशासनिक एवं राजस्व व्यवस्थाओं, धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलनों, स्थापत्य और साहित्यिक योगदान पर ध्यान देना उपयोगी है। प्रारंभिक तथ्यों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और सामाजिक प्रक्रियाओं के बीच समानताओं तथा अंतरों को भी समझें।
प्रारंभिक मध्यकालीन भारत — क्षेत्रीय राज्यों का उदय, पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट जैसी प्रमुख शक्तियाँ, त्रिपक्षीय संघर्ष तथा राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन।
राजपूत राज्य — प्रमुख राजवंश, राजनीतिक संगठन, आपसी संघर्ष, सैन्य परंपराएँ तथा उत्तर भारत की राजनीतिक परिस्थितियाँ।
अरबों का सिंध पर आक्रमण — पृष्ठभूमि, मुहम्मद बिन कासिम का अभियान, सिंध पर अरब नियंत्रण, प्रशासन तथा इसके राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव।
तुर्क आक्रमण — महमूद गजनवी के अभियान, मुहम्मद गोरी के आक्रमण, तराइन के युद्ध और उत्तर भारत में तुर्क सत्ता की स्थापना की पृष्ठभूमि।
दिल्ली सल्तनत — गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंश; प्रशासन, इक्ता व्यवस्था, बाजार नियंत्रण, राजस्व व्यवस्था तथा सल्तनत का विस्तार और पतन।
विजयनगर साम्राज्य — स्थापना, प्रमुख शासक, प्रशासन, अमरनायक व्यवस्था, कृषि एवं व्यापार, कला-संस्कृति और 1565 के तालीकोटा युद्ध का महत्त्व।
बहमनी राज्य — स्थापना, प्रमुख शासक, प्रशासन, दक्कन की राजनीति, विजयनगर के साथ संघर्ष, महमूद गवाँ के सुधार और बहमनी राज्य का विघटन।
मुगल साम्राज्य — बाबर से औरंगजेब तक प्रमुख शासक, प्रमुख युद्ध, मनसबदारी एवं जागीरदारी व्यवस्थाएँ, राजस्व प्रणाली, धार्मिक नीतियाँ और साम्राज्य का विस्तार।
क्षेत्रीय शक्तियों का उदय — मराठा शक्ति, शिवाजी का प्रशासन, राजपूत राज्य तथा अवध और हैदराबाद जैसे क्षेत्रीय राज्यों का विकास।
धार्मिक आंदोलन — भक्ति परंपरा के प्रमुख संत, सूफी सिलसिले, निर्गुण और सगुण भक्ति, धार्मिक विचारों का प्रसार तथा सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव।
मध्यकालीन भारत की कला, स्थापत्य और संस्कृति — मंदिर एवं मस्जिद स्थापत्य, मकबरे, किले, चित्रकला, साहित्य, संगीत और विभिन्न क्षेत्रीय शैलियाँ।