आधुनिक भारतीय इतिहास का अध्ययन भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन से लेकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, स्वतंत्रता और देश के विभाजन तक की प्रमुख ऐतिहासिक प्रक्रियाओं को समझने में सहायता करता है। इस काल में भारत की राजनीतिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, समाज और राष्ट्रीय चेतना में व्यापक परिवर्तन हुए।
ब्रिटिश शासन के विस्तार के साथ भूमि-राजस्व व्यवस्थाओं, औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों, प्रशासन और शिक्षा में बदलाव हुए। इन परिवर्तनों के विरुद्ध विभिन्न क्षेत्रों में विरोध विकसित हुआ। समय के साथ सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों, किसान और जनजातीय विद्रोहों, क्रांतिकारी गतिविधियों तथा संगठित राष्ट्रीय आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक स्वरूप दिया।
आधुनिक भारतीय इतिहास से संबंधित प्रश्नों में घटनाओं के कालक्रम, प्रमुख व्यक्तियों, संगठनों, अधिनियमों, आंदोलनों और उनके परिणामों पर विशेष ध्यान देना उपयोगी है। केवल घटनाओं की तिथियाँ याद करने के बजाय उनकी पृष्ठभूमि, उद्देश्य, नेतृत्व, जनभागीदारी और ऐतिहासिक महत्त्व को समझें।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रमुख घटनाओं, अधिनियमों, संगठनों और नेताओं के तथ्यों का पुनरावर्तन करें। मुख्य परीक्षा के लिए राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरणों, औपनिवेशिक नीतियों, सामाजिक परिवर्तनों और स्वतंत्रता प्राप्ति की प्रक्रिया का कारण-परिणाम के आधार पर विश्लेषण करने का अभ्यास करें।
भारत में यूरोपियों का आगमन — पुर्तगाली, डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनियाँ, प्रमुख व्यापारिक केंद्र तथा यूरोपीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा।
ब्रिटिश विस्तार और भारत में विजय — प्लासी एवं बक्सर के युद्ध, सहायक संधि, व्यपगत सिद्धांत और भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता के विस्तार की प्रक्रिया।
सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन — ब्रह्म समाज, आर्य समाज, प्रार्थना समाज, रामकृष्ण मिशन, अलीगढ़ आंदोलन तथा शिक्षा, महिलाओं और सामाजिक सुधार से जुड़े प्रयास।
1857 का विद्रोह — राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सैन्य और तात्कालिक कारण; प्रमुख केंद्र एवं नेता; विद्रोह की प्रकृति, असफलता के कारण और परिणाम।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना — 1885 की पृष्ठभूमि, ए. ओ. ह्यूम की भूमिका, प्रारंभिक अधिवेशन, प्रमुख उद्देश्य और प्रारंभिक राष्ट्रवाद का विकास।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उदारवादी एवं उग्रवादी चरण — दोनों धाराओं के विचार, तरीके, प्रमुख नेता, बंगाल विभाजन की पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय आंदोलन में उनके योगदान।
बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन — 1905 का विभाजन, बहिष्कार एवं स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा, जनभागीदारी और 1911 में विभाजन रद्द किए जाने का महत्त्व।
होम रूल आंदोलन — 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट से जुड़े होम रूल लीग, स्वशासन की माँग, प्रचार गतिविधियाँ और आंदोलन का ऐतिहासिक महत्त्व।
गांधी युग — चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद के प्रारंभिक संघर्ष; असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि, कार्यक्रम तथा परिणाम।
क्रांतिकारी आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस — प्रमुख क्रांतिकारी संगठन, महत्वपूर्ण घटनाएँ, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन, आजाद हिंद फौज और स्वतंत्रता संघर्ष में उनकी भूमिका।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और भारत का विभाजन — द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की परिस्थितियाँ, कैबिनेट मिशन, माउंटबेटन योजना, स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और विभाजन के परिणाम।